भूरे साहब और जौहर

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इतने लिबरला गए

कर भारतीयता का विरोध

संवेदनहीनता की पराकाष्ठा लांघी

रहा ना कोई बोध

 

लगे दुखद त्रासदी नहीं

नारी का बलात्कार

चकित हैं ये, क्यों प्राण तजे क्यों ना की,

दासता सहर्ष स्वीकार

 

पाश्चात्य पद्दति के

निम्न स्तर के, ये दास

अपनी संस्कृति सभ्यता का

दिन-रैन करें उपहास

– @dimple_kaul