Deepawali

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सर्वोच्च केवल न्यायालय वह
सर्वोपरि अपने राम लल्ला
आतिशबाज़ी ही छीनी है
छीनोगे कैसे धर्म भला

मूक पशु की चीत्कार
कर देते हो अनसुनी
हैं कोटि विषय सुलझाने को
पर प्रिय आपको सनसनी

अन्न के बोरे भर-भर कर
यहाँ धर्म खरीदा जाता है
बर्तानिया के बचे न्याय को
नज़र वह नहीं आता है

आज के औरंगज़ेब सुनो
हम हैं संतान शिवाजी की
तुम नित नए ताने-बाने बुनो
हम मानेंगे ना हार कभी

होंगे एकजुट सनातनी
भगवा फिर से लहराएगा
होगी ना समाज में तनातनी
एकता का स्वर छाएगा

कसम राम की खाते हैं
हम मंदिर वहीँ बनाएँगे
उन्मुक्त उल्लास उत्सव उमंग
दीपावली पर्व मनाएंगे

-@dimple_kaul