Garv Se Kaho Hindu Ho

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स्मृति पटल पर अंकित कर दो

अखिल विश्व में जय कर दो

 

अनुनय विनय के क्षण बीते

अब संयम और सत्य जीते

 

सिन्दूर में विष मिलाते

संस्कृति को असभ्य जतलाते

 

होली, दिवाली,गणेशोत्सव

में मचाते उपद्रवी कलरव

 

कल के जन्मे सम्प्रदाय

आपत्ति जिन्हे पूजने पे गाय

 

गणित, विज्ञान, कला, शिल्प

के संग लूटा आत्म विश्वास

काल का चला है चक्र

निर्भय हो, करो निर्भीक प्रयास

 

ढूँढे जिसे समस्त जगत

धर्म का केंद्र बिंदु हो

मुक्त-कंठ कर उदघोष

गर्व से कहो हिन्दू हो

 

-@dimple_kaul