कुलभूषण जाधव

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सिन्दूर नहीं मिटा
मिटी अमन की आशा
सत्तर वर्षों तक देखा हमने
बहुत तमाशा

घर तोड़ गया
कैसा भाई
डूबी रैन
निशा छाई

अब भी है अपेक्षा
शान्ति की
कब तक पालोगे
यह भ्रान्ति

रक्त-बीज है वह
मित्र नहीं
चलन पुराना
चरित्र भी

उसका उपाय
नहीं धन्वंतरि
डाक बाँचना
करो बंद मंत्री

करो समाप्त
यह घिनौना प्रपंच
संहारो पाखंडी को
पुकारे समय का मंच

-@dimple_kaul